- आई.पी.एस. के बच्चों ने जाना साक्षरता का महत्व,लिया आस-पास के असाक्षरों को साक्षर करने का संकल्प।
- साक्षर व्यक्ति सक्रिय रहकर समाज एवं राष्ट्र के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करता है- डॉ. संजय गुप्ता।
- सफल और सुनहरे भविष्य को साकार रुप में देखना है तो सर्वत्र साक्षरता का अलख जगाना पड़ेगा-संजय गुप्ता।
विकास का होगा सुगम रास्ता,
जब जन-जन में फैलेगा साक्षरता।
कोरबा:- यूनेस्को ने 7 नवंबर 1965 में ये फैसला किया कि अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस (World Literacy Day) हर वर्ष 8 सितंबर को मनाया जाएगा जो कि 1966 से मनाना शुरु किया गया।व्यक्ति,समाज और समुदाय के लिए साक्षरता के बड़े महत्व को ध्यान दिलाने के लिए पूरे विश्वभर में इसे मनाना शुरु किया गया। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए वयस्क शिक्षा और साक्षरता की दर को दुबारा ध्यान दिलाने के लिए इस दिन को खासतौर पर मनाया जाता है।
शिक्षा पर वैश्विक निगरानी रिपोर्ट के अनुसार ये ध्यान देने योग्य है कि हर पाँच में से एक पुरुष और दो तिहाई महिलाएँ अनपढ़ हैं। कुछ बच्चों की पहुँच आज भी स्कूलों से बाहर है और कुछ बच्चे स्कूल में अनियमित रहते हैं। समाज की साक्षरता दर को बढ़ावा देने के लिए असाधारण मूल्य के लिखित शब्द और जरुरत के बारे में सार्वजनिक चेतना को बढ़ावा देने के लिए इस दिन को मनाने का खास महत्व है।साक्षरता इंसान के जीवन को आकार देने के साथ ही उनकी सांस्कृतिक पहचान को भी बनाता है।
दीपका स्थित इंडस पब्लिक स्कूल में विश्व साक्षरता दिवस पर विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। कक्षा 3 से लेकर कक्षा 5 तक के विद्यार्थियों ने विश्व साक्षरता दिवस शीर्षक पर अनेक प्रकार के प्रेरक स्लोगन लिखकर भावी पीढ़ी को शिक्षा के प्रति जागरुक करने का प्रयास किया।कक्षा 6 से लेकर कक्षा 9 तक के विद्यार्थियों ने भी विविध प्रतियोगिताओें के द्वारा विश्व साक्षरता दिवस में अपनी सहभागिता दिखाई।कक्षा नवमी के विद्यार्थियों ने अनेक आकर्षक पेंटिंग बनाकर अपनी सोच को कागज पर प्रदर्शित किया। वरिष्ठ कक्षा वर्ग में कक्षा-आठवीं एवं नवमीं के विद्यार्थियों के मध्य वाद-विवाद प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। वाद-विवाद प्रतियोगिता का विषय था-’ साक्षरता मानव समाज के लिए अतिआवश्यक है’। बच्चों ने विभिन्न तर्क देकर साक्षरता के महत्व पर प्रकाश डालने का प्रयास किया।
विद्यालय के बच्चों ने शपथ ली कि वे अपने क्षेत्र के असाक्षर व्यक्तियों को साक्षर बनाने में सहयोग करेंगे। बच्चों ने विश्व साक्षरता दिवस का महत्व जाना।
विद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजय गुप्ता ने कहा कि एक साक्षर मनुष्य के सोच-विचार सामान्य लोगों के सोच-विचार से अलग होता है। वह सक्रिय रहकर समाज एवं राष्ट्र के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करता है। आज हम सबको मिलकर साक्षरता को बढ़ावा देने का प्रयास करना चाहिए। आज सरकार भी विभिन्न कार्यक्रमों के द्वारा जागरुकता लाकर जनसमुदाय के मध्य साक्षरता का प्रतिशत बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। आज हम अपने आसपास देखते हैं असाक्षरता कि वजह से लोग अपने अधिकारों को ना जानने की वजह उनके साथ विभिन्न तरह की धोखाधड़ी, कूटरचना का शिकार होते रहते हैं, असाक्षरता भ्रस्टाचार को जन्म देती है, जो कि समाज को ही प्रभावित करती है, क्योकि भ्रस्टाचार से मानव समाज को नुकसान पहुंचता है और प्रत्येक व्यक्ति मानव समाज का ही हिस्सा होता है, प्रायः निचले तबके के लोग आर्थिक तंगी की वजह से अपने बच्चों को साक्षर बनाने में नाकामयाब होते हैं जिससे असाक्षरत व्यक्ति की अधिकता समाज को कमजोर बनाती है, निश्चित ही साक्षरता से निर्णय करने की शक्ति, ज्ञान होने से सहनशक्ति व परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति धैर्यता इत्यादि शक्तियां डेवेलोप होती है कम्युनिकेशन स्किल डेवेलोप होता है दृश्टिकोण बदलता है हर चीजों को समझकर रेसोपोंस देने की एबिलिटी जागृत होती है, व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त होता किससे कैसा व्यवहार करना है,आज सही निर्णय शक्ति ना होने से लोगों का शोषण हो रहा है, आज असाक्षरता की वजह से कोई कूटरचना कर किसी की संपत्ति पर अपना अधिकार जता लेता है हड़प लेता है, आज असाक्षरता की वजह से लोग अंधविश्वास, जादू टोना, इत्यादि को बढ़ावे देते रहते हैं, आज लोगों को अपने वोट की कीमत पता ना होने से चंद पैसों के लोभ में आकर गलत व्यक्ति को चयन कर सत्ता पर बैठाकर अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार लेते हैं व विकास को रोकने के भागीदार बन जाते हैं, सम्पूर्ण देश का माहौल ऐसा बना हुआ है की जब झूठों के बीच कोई सत्य कहता है तो उसे पागल समझा जाता है जिसकी वजह है असाक्षरता सहीं क्या गलत क्या यह परख शक्ति नहीं होती जिसकी वजह से सहीं गलत की पहचान ना कर पाने से खामियाजा भुगतना पड़ता है, शिक्षा के माध्यम से समाज में फैली कुरीतियों और अंधविश्वास से मुक्ति दिलाई जा सकती है, आज कल तो गाँव की बेटियां भी बड़े बड़े शहरों में पढ़ने जाने लगी हैं, क्योंकि एक शिक्षित महिला पूरे परिवार को शिक्षित बना सकती है यह सकारात्मक बदलाओ देखने को मिला है, साक्षरता (Saksharta) केवल किताबी ज्ञान हासिल करने तक सीमित नहीं है बल्कि साक्षरता का मुख्य उदेश्य लोगों में उन के अधिकारों के प्रति और उनके कर्तव्यों के प्रति उन्हें जागरूक करना है साक्षरता गरीबी , लिंग अनुपात सुधारने , भ्रष्टाचार और आतंकबाद को खत्म करने में समर्थ है आज भारत की साक्षरता दर में सुधार जरूर हुआ है किन्तु अभी भी यह अपने मकसद से कोसों दूर है।
शिक्षा ही मनुष्य को मनुष्यता की तरफ़ ले जाती है किसी भी देश का सबसे बड़ा अभिशाप वहां के निवासियों की निरक्षता है मनुष्य और पशु में यदि कोई अंतर है तो वो है बुद्धि का संसार के किसी ना किसी हिस्से में निरक्षता रुपी अभिशाप आज भी जड़ों को खोकला कर रहा है। आज हमें जरूरत है प्राथमिक शिक्षा को प्राथमिकता दी जाए क्योंकि जब पेड़ को जड़ से सींचा जाए तभी पेड़ फलेगा –फूलेगा नई युवा पीढ़ी को प्रेरित करने से ही साक्षरता के सही अर्थ को समझा जा सकता है। हमारा भी कर्तव्य बनता है कि यदि हम साक्षर हैं तो अपने आस-पास के असाक्षर लोगों को चिन्हित कर उन्हें साक्षर बनाने में सहयोग करें, क्योंकि यदि हमें सफल और सुनहरे भविष्य को साकार रुप में देखना है तो सर्वत्र साक्षरता का अलख तो जगाना ही पड़ेगा।