कोरबा:- इंडस पब्लिक स्कूल के प्राचार्य डॉ संजय गुप्ता से हुई परिचर्चा में उन्होंने बतलाया कि विश्व मानवतावादी दिवस के अवसर पर ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन किया गया था, जिसका मूल उद्देश्य बच्चों में मानवता मानवीय मूल्यों का बीज बोना था जैसा कि आज के दौर में मानवीय मूल्यों के हास होने की वजह से मानवता कहीं पीछे छुट्टी चली जा रही है, लोग अलग अलग धर्म मजहब समुदाय जाती पंथ में बंटने से विचारधाराओं की असमानता समाज मे उत्तपन्न होने से मानविय मूल्यों का समाज मे हास हुवा जिससे आज लोग मदद करने से पहले यह जानने के इक्षुक होते हैं, कि जिसकी मदद कर रहे हैं वह हमारे धर्म, मजहब, जाती, पंथ, सगे का है या नहीं इंसानियत कहीं पीछे छुटे जा रही है तो हमें आज जरूरत है, मानवीय मूल्यों के बीज बच्चों के मन मे बोने की मानव के प्रत्येक गुणों के बारे में विस्तार से समझाने की, व उन्हें धारण करने की।
इंडस पब्लिक स्कूल बच्चों के सर्वांगीण विकास पर फोकस करता है जिसमें भौतिक, सामाजिक, आध्यात्मिक सभी एस्पेक्टस मे बच्चों के मानसिक विकास पर फोकस करता है तो मानवतावादी होना एक गुण है जिस गुण का आज के समाज मे हास हो चला है तो जैसा कि प्रत्येक गुण मनुस्य के अंदर ही विद्धमान होता है बस उन गुणों से रूबरू होकर उन्हें उभारने की जरूरत होती है इस संबंध में बच्चों को विस्तार से बतलाया गया कि जो मनुस्य किसी कष्ठ में पड़े प्राणी को देखकर अंदर से उनकी फीलिंग्स को महसूस कर सकता है व आपेही अपने स्तर पर उसकी मदद करने को आगे आ जाता है वह मानवता वादी है, मानवतावादी में सेवा, स्नेह, करुणा, दया के गुण होते हैं वह समाज के प्रत्येक व्यक्ति को समानता की भावना से देखते हैं वह हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई इन सभी से ऊपर उठकर मानवता को अहमियत देता है, हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई तो इस शरीर के धर्म हैं जो हमें पुस्तैनी विरासत में मिलते हैं पर प्रत्येक शरीर मे विद्धमान आत्मा जो इस शरीर की मालिक होती है उसका धर्म से शांति, प्रेम, दया, करुणा, ममता, सेवा, सुख होता है कोई किसीकी सेवा करता है तो उससे सामने वाले के आत्मा को तृप्त करता है साथ ही सुख का अनुभव स्वयं करता है तो सुख आत्मा का धर्म हुवा इसी तरह करुणा, दया, ममता, प्रेम व शांति भी, जब स्वयं के हित से ऊपर उठकर कोई परहित, परमार्थ, निःस्वार्थ, परहितार्थ, परसहायता कर है तो वह मानवतावादी है, मानवतावादी में विश्व बंधुत्व की भावना होती है वशुधैव कुटुम्भकम की भावना होती है, मानवतावादी व्यक्ति के व्यक्तित्व में मानवीय मूल्य जागृत होते हैं, किसी भी मानव के प्रति घृणा भाव नहीं होता, जितने भी गुरु, पीर, पैगम्बर हुवे सबने मानवता के राह पर चलने की प्रेरणा दी जैसे कि महात्मा गांधी जिन्होंने सत्य व अहिंसा रूपी मानवीय मूल्यों के बलबूते भारत को आजादी दिलवाई, मदर टेरेसा ने मानवता के लिये सेवा भाव से कितने ही लोगों को नवजीवन दिया, भीमराव अंबेडकर द्वारा दी गई संविधान आज मानवता के हनन होने से मानव समाज को रोकती है, वहीं सभी धर्मों के धर्म ग्रंथों में वर्णित जीवन जीने हेतु मार्गदर्शन मानव को इमोशनली जागृत कर मानवीय मूल्यों की धारणा मन मे करवाकर मानवतावादी बनने हेतु मार्गदर्शन करती है।
हम सभी मनुस्य आपस मे आत्मिक दृश्टिकोण से भाई भाई हैं चाहे हिन्दू हो मुस्लिम हो सिख हो ईसाई है जबकि आत्मा एक परमात्मा की संतान होने के नाते आत्मिक दृश्टिकोण से हम सभी आपस में भाई भाई हैं, मनांव होने के नाते हममे सहयोग की भावना होनी चाहिए चूंकि परस्पर एक दूसरे के सहयोग से ही इस विश्व को संतुलित रूप से चलना है, आज बढ़ती टेक्नोलॉजी से मनुस्य बाहरी जगत के सभी चीजों का ज्ञान ले ले रहा है पर अपने अंदर के मानवीय मूल्यों नैतिक मूल्यों गुणों से उतना ही दूर होता जा रहा है क्योकि अपने अंदर के गुणों से रूबरू होने के लिये अंतर्मुखी होने की आवश्यकता है क्योकि बिना खुद के आंतरिक गुणों के जागृति के हम महज एक दूसरे की कॉपी की हुई जिंदगी जीते रहते हैं, आज समाज मे फैली अशांति व नफरत का मूल कारण मानवीय मूल्यों का हास है जिसे पुनर जागृत करना अत्यंत आवस्यक है, मदद की भावना की जागृति अत्यंत आवश्यक है चूंकि आज का व्यक्ति भौतिकता वादी होने से स्वार्थी हो चला है अपने पड़ोसी तक से बातचीत लोगो की बन्द हो रही घर घर मे भाई भाई में कलह क्लेश हो रहे हैं एक टुकड़े जमीन के लिये रिस्तों में जनमाल की हानि हो जा रही है इन सबकी वजह स्वार्थी जीवन शैली व मानवीय मूल्यों का हास है अगर हम बच्चों को बचपन से ही निस्वार्थ मदद करने की भावना जागृत करते हैं तो वह बड़ा होकर उक्त गुण से बच्चा रुबरु रहेगा जागृत रहेगा, प्रायः लोग ऐसे व्यक्ति को इमोशनल कहकर चिढ़ाते हैं पर यह एक मानवीय गुण है व जिसमे इस मानवता रूपी मानवीय गुण की जागृति हुई होती है वह अपने आप मे यूनिक होता है कोई उसकी कॉपी नहीं कर सकता, वैसे तो कुदरत ने सभी को एक एक गुणों से नवाजा है सब अपने आप मे यूनिक है पर उस यूनिकनेस को जानना व उसे प्रत्यक्ष कर शक्ति के रूप में इस्तेमाल करना ही अपने अलग पहचान बनाता है जैसे मदर टेरेसा ने अपनी पहचान बनाई उनकी मानवीय गुण सेवा, करुणा को जागृत कर वह विश्व विख्यात हुई आज हर कोई उन्हें जानता है, पर आज लोग एक दूसरे को कॉपी करके वैसा बनना चाहते हैं इस चक्कर मे अपने ओरिजिनल संस्कार से दूर रहते हैं अपने अंदर विद्धमान ओरिजिनल पोटेंशियलिटी को निखार नहीं पाते, तो हम सबको अपने अंदर के मानवीय मूल्यों को जागृत कर उदार व्यक्तित्व का बनना है, उदारता जिसमे होती है, उसका हृदय विशाल होता है, वह सदैव किसीकी भी मदद करने को तैयार रहता है फिर उसकी मदद कितनी भी रिस्की क्यों ना हो मानवतावादी में समानता की भावना होती है। उसका व्यक्तित्व जाती, धर्म, अमीरी, गरीबी, छोटा बड़ा, इन सबसे परे होता है, यह पूरा विश्व ही समानता की भावना से चलता है जैसे हमारे शरीर मे भोजन पानी समान रूप से मिले तो स्वास्थ्य किस भी मिनरल या प्रोटीन विटामिन की कमी या अधिकता हुई तो शरीर अस्वस्थ वैसे ही यह सृष्टि भी समानता के भावना से चल रही है कुदरत में मौजूद हर चीज हर किसी के लिये समान अधिकार है जीने का अधिकार है तो सहयोग की भावना से एक दूसरे की मदद करते हुवे हमे एक सुंदर समाज का निर्माण करना है जिसमे आप बच्चे कल के देश के भविष्य हैं।