• वृध्दजनों घर के बागवान की तरह होते हैं, उनके अनुभव से घर के सदस्यों में संस्कार प्रवाहित होते हैं – डॉ संजय गुप्ता

इंडस पब्लिक स्कूल दीपिका के प्राचार्य डॉ. संजय गुप्ता ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि आज वृद्धजन दिवस के अवसर पर ऑनलाइन वेबीनार के माध्यम से वृद्ध जनों के प्रति सम्मान व आदर भाव के बीज बोए जाने हेतु बच्चों को ऑनलाइन मंच पर एकत्रित कर शिक्षा व प्रेरणा दी गई। इस दौरान बच्चों ने जाना की घर मे बड़े बुजुर्ग की अहमियत बिल्कुल उसी तरह होती है। जिस तरह गार्डन में एक बागवान की जरूरत होती है, जैसे बागवान गार्डन के सभी पौधों की देखरेख करते हैं, उन्हें जल खाद देकर पोषण प्रदान करते हैं। बिल्कुल उसी प्रकार घर के बड़े बुजुर्ग, वृध्दजन घरों के मुखिया डिसिशन मेकर होते हैं। बड़े बुजुर्ग को जीवन के वास्तविक अनुभव होते हैं। हमारे घर पर दादा दादी नाना नानी की महत्ता एक मुखिया के तौर पर होती है। चूंकि वह जीवन के उस पड़ाव को पास कर आगे बढ़े होते हैं। जिस पड़ाव पर हम या हमारे घर के अन्य सदस्य होते हैं। पहले जॉइंट फैमली हुवा करती थी जिसमे परिवार में दादी दादी मम्मी पापा चाचा चाची आदि हुवा करते थे तब कोई भी प्रॉब्लम जब आती थी तो सब मे बंट जाती थी किसी व्यक्ति विशेष को टेंशन नहीं लेनी पड़ती थी बिजनेस व कार्य के सिलसिले में आज लोग गृह ग्राम छोड़ शहरों की ओर रुख करते गए जिसमे पति पत्नी व बच्चे ही रहने लगे व धीरे धीरे जॉइंट फैमली की व्यवस्था सिकुड़ते गयी तथा दादी दादी बहोत कम ही घरों में साथ रहते गए व आज जब अनेकों गांव शहरों में तब्दील हो गए वक़्त बदला वक़्त के साथ लोगों के जीने के तरीके भी बदलते गए व लोग अपने घर के वृद्धों को वृद्धाश्रम में रखने लगे व खुद उनके द्वारा मिलने वाले अनुभव, संस्कार से वंचित होते गए, नतीजतन परिजनों ने संस्कार पनपने की जिम्मेदारी स्कूलों पर छोड़ दी व स्कूलों ने बाहरी किताबी ज्ञान तो मिल जाये पर संस्कार तो घर के बड़े बुजुर्ग ही देते थे, नतीजतन आज समाज मे पॉजिटिव संस्कार, इनर क्वालिटी, गुणों का हास होता गया जिसके फलस्वरूप समाज मे नेगाइटिविटी छाती गई, लोगों में किताबी ज्ञान तो है पर व्यवहारिक ज्ञान कम होने से समाज भटकता गया, वृद्ध जनों के प्रति हमें आदर की भावना रखनी चाहिए बहोत से लोग वृध्द जनों को घर के कोने के एक रम तक सीमित कर रखते हैं व उनसे बातें तक करना भी जरूरी नहीं समझते इससे उनके दिल पर क्या बीतती होगी इतनी आस से कोई अपने बच्चों को पालता है पोषण प्रदान करता है यह सोचकर कि कभी यह बच्चा हमारे बुढ़ापे का सहारा बनेगा लेकिन जब वही बच्चा जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर घर के वृद्धों को बोझ समझते हुवे उसे अपने आप से अलग करता है तो उनपर क्या बीतती होगी यह सोचने वाली बात है, इस कमी को भांपते हुवे आज आई.पी.एस. द्वारा ऑनलाइन मंच के माध्यम से बच्चों को शिक्षा दी गई कि अपने घर के वृद्धजनों के साथ हमारा व्यवहार सकारात्मक होना चाहिए, हमे उनके साथ कुछ पल जरूर व्यतीत करना चाहिए इससे हमारा ही भला होगा, उनके द्वारा सुनाई जाने वाली कहानियों के माध्यम से हमारे जहन में संस्कार भरता है हमें जीवन जीने के लिये मार्गदर्शन मिलता है, उनके अनुभव हमारे लिए जीवन के रास्ते बन सकते हैं इसलिय हमें आने घर के वृध्दजनों की कद्र करनी चाहिए, उनका आदर करना चाहिए, उनसे प्यार से बात करनी चाहिए उनके साथ सुनहरे पल व्यतीत करने चाहिए इसके अलावा सफर के दौरान भी जब कभी हमे यह दिखे की बस या ट्रैन में कोई बुजुर्ग है जो खड़े हैं तो हमें उठकर उन्हें सीट प्रदान करनी चाहिए, जब कहीं लम्बी कतार लगी हो तो वृध्दजनों को आगे मौका देना चाहिए इस तरह से हमें अपने मन मे वृध्दजनों के प्रति सकारात्मक भाव रखने चाहिए

आगे आईपीएस के प्राचार्य डॉक्टर संजय गुप्ता ने बतलाया कि इंडस पब्लिक स्कूल दीपका समय समय और इस तरह की गतिविधियां करता रहता है जिससे बच्चों को किताबी ज्ञान के अलावे सांसारिक व व्यवहारिक ज्ञान, जीवन जीने की कला सिखाई जा सके क्योकि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्रियां नहीं होती बल्कि शिक्षा का उद्देश्य इंसान को गुणवान बनाना, चरित्रवान बनाना भी होता है जिसके लिये इंडस पब्लिक स्कूल संकल्पित है, व जिस मकसद से ही इस तरह के सामाजिक गतिविधियों का आयोजन कर विद्यालय की ओर से सामाजिक योगदान प्रदान करने का प्रयास निरंतर करते रहते हैं, लॉक डाउन के दौरान जबकि सभी बच्चे घरों में हैं ऐसी स्थिति में उन्हें ऑनलाइन माध्यम से शिक्षा बदस्तूर मुहैय्या करवाई जा रही है, व समय समय पर सोशल एक्टिविटी के माध्यम से भी बच्चों को व्यस्त रखने का प्रयास जारी रहता है।