आरा:- वो गुहार लगाता रहा… मदद मांगता रहा… रिपोर्टर ने भी याचना की… हेल्पलाइन से मदद मांगी… हर कोई आराम से जवाब देता रहा… ड्यूटी डॉक्टर से अपील की… नर्स से मिन्नत की… लेकिन कुछ काम न आया और आखिरकार रामशंकर बिना किसी मदद के कैमरे के सामने दम तोड़ दिया, अब रामशंकर का बेटा बेसहारा हो गया.
कोविड महामारी झेल रहे बिहार की हालत बदहाल है. आरा के सदर अस्पताल में लोग बिना इलाज ऐसे ही मर रहे हैं. अस्पताल में बिजली नहीं है, इसलिए महिला अपने पति को नेब्युलाइझ़र नहीं दे पा रही है. डॉक्टर देखने नहीं आते, तीमारदार अपनी जान को जोखिम में डालकर अपने मरीजों की देखभाल कर रहे हैं, तीन वेंटिलेटर वाले बेड 8 महीने से बंद पड़े हैं.
आरा के सदर अस्पताल में ही रामशंकर को ऑक्सीजन के गिरते स्तर के चलते भर्ती कराया गया था. बेटे का कहना है कि दोपहर हो गई लेकिन डॉक्टर देखने नहीं आया. वार्ड में जितने तीमारदार हैं, उतना ही दर्द है. राम शंकर का बेटा कहता है कि किसी को भी फोन मिलाओ, डॉक्टर दो-दो तीन-तीन दिन तक देखने नहीं आते.
रामशंकर के लिए मदद की गुहार करते हुए जब संवाददाता ड्यूटी डॉक्टर शाइस्ता के पास पहुंचे और पूछा कि बिजली क्यों नहीं है तो डॉक्टर साहिबा ने कहा कि इसके लिए मैनेजर जिम्मेदार हैं, हमने उनसे याचिका लगाई कि नीचे एक मरीज तड़प रहा है और कोई डॉक्टर नहीं है तो डॉक्टर साहिबा ने कहा कि सर एक डॉक्टर भेज रहे हैं.
डॉक्टर साहिबा ने मरीज की बिगड़ती हालत सुनने के बाद भी कुर्सी से उठकर खुद को तकलीफ देना जरूरी नहीं समझा. हम मिन्नत करते रहे और डॉक्टर टालती रही. हमने डॉक्टर साहिबा से पूछा कि मैनेजर के बारे में ही बताइए तो डॉक्टर साहिबा ने कहा कि मैनेजर के बारे में गार्ड से पूछिए हम पहले दिन आए हैं.
राम शंकर की मदद के लिए हमने कोविड-19 वार्ड के बाहर लगे हुए पोस्टर पर प्रदीप कुमार के दिए हुए नंबर पर फोन मिलाया. हमने उन्हें कहा कि आपकी यहां ड्यूटी है तो उन्होंने कहा कि ड्यूटी हमारी नहीं बल्कि कौशल दुबे की है. वहां मरीज की हालत खराब हो रही थी लेकिन तब तक भी कोई डॉक्टर या नर्स नीचे उन्हें देखने नहीं आया.
नीचे पोस्टर पर कौशल दुबे का नंबर है हमने उनको भी फोन मिलाया. हमने कौशल दुबे को कहा कि नीचे एक मरीज की हालत खराब है किसी डॉक्टर को जल्दी भेजिए, कौशल दुबे कह रहे हैं कि हम किसी से बात करते हैं और इतना कहकर कौशल दुबे ने फोन काट दिया.
राम शंकर के बेटे कहते हैं कि हम अपने पिताजी को 26 तारीख को यहां लेकर आए थे, तब उनका ऑक्सीजन 93 पर था. उन्होंने कहा, ‘डॉक्टर ने हमें कहा कि बाहर से लेकर कुछ नहीं आना है जो यहां है उसी से इलाज होगा और जब इलाज यहां होने लगा तो उनका ऑक्सीजन घटकर 36 पर आ गया, न नर्स आ रही है, न डॉक्टर आ रही है.’
राम शंकर के बेटे ने बताया, ‘डॉक्टर सिर्फ डिस्चार्ज करने आते हैं और फूल माला पहनाते हैं, परसों उन्होंने हमारे मरीज को फूल माला पहनाया और ऑक्सीजन लगाकर नाप करके बोले कि इनका स्तर 93 है, वह वीडियो बना रहे थे और थोड़ी देर में हमारा मरीज गिर गया, आज उनका ऑक्सीजन 36 पर आ गया है, कल से तबीयत गड़बड़ हुई है.’
संवाददाता आशुतोष मिश्रा की लाख कोशिश के बाद भी राम शंकर जिंदगी से जंग हार गए. बेटे ने बताया कि बाबूजी की ऑक्सीजन गिरकर जीरो पर चला गया, अब मैं अनाथ हो गया. रामशंकर अपने पीछे दो बेटों और दो बेटियों को छोड़ गए हैं. बेटा कहता है कि अब मुझसे नहीं जिया जाएगा.
खैर, राम शंकर की मौत के बाद अस्पताल के मैनेजर पहुंचे हैं और बड़ी बेशर्मी से कहते हैं कि बिजली तो है. उन्होंने कहा हमारी ड्यूटी दिन के 10:00 बजे से लेकर रात के 10:00 बजे तक है, एक शख्स की मौत हो गई लेकिन इन मैनेजर साहब के तेवर सिस्टम की बेशर्मी दिखाते हैं.