- सत्य व अहिंसा जैसे मानवीय गुणों को, श्रीमत भगवत गीता में उच्चारे गए महावाक्यों को प्रैक्टिकल जीवन मे चरितार्थ करने वाले महात्मा गांधी (बापू) को आई.पी.एस. दीपका द्वारा किया गया याद उनके द्वारा प्रसस्त मार्ग पर जीवन जीने का लिया गया संकल्प
- सत्य व अहिंसा को प्रत्यक्ष करने वाले महात्मा गांधी ( बापू ) जी की जीवन कहानी से हमें जीवन जीने की कला सीखने को मिलती है – डॉ संजय गुप्ता आई.पी.एस.
आईपीएस दीपका के प्राचार्य डॉक्टर संजय गुप्ता ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बतलाया कि इंडस पब्लिक स्कूल दीपिका द्वारा आज दिनांक 2 अक्टूबर को जोकि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के जन्मदिन के साथ-साथ भारत देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती भी 2 अक्टूबर को मनाई जाती है इस अवसर पर दोनों ही महापुरुषों को याद करते हुए इंडस पब्लिक स्कूल दीपिका द्वारा महात्मा गांधी के वेशभूषा धारण कर बच्चों को रोल प्ले करने की एक्टिविटी प्रदान की गई साथ ही लाल बहादुर शास्त्री जीके वेशभूषा धारण कर अपनी तस्वीर है साझा करने के लिए एक्टिविटी दी गई थी इस दौरान नर्सरी से यूकेजी तक के बच्चों ने जिनके उम्र तकरीबन 3 से 5 वर्ष है उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया व कुछ ने इस फैंसी ड्रेस कंपटीशन में लाल बहादुर शास्त्री के परिधान धारण कर अपनी तस्वीरें विद्यालय प्रांगण की व्हाट्सएप नंबर पर साझा की वहीं कुछ बच्चों ने महात्मा गांधी जी के परिधान धारण कर उनकी तरह रोल प्ले करते हुए वीडियो साझा किए इस दौरान आईपीएस दीपिका द्वारा सफाई मित्रों का स्वक्षता क्रांति अवार्ड से सम्मानित भी किया गया, साथ ही फैंसी ड्रेस कॉम्पिटिशन व महात्मा गांधी की तरह रोल प्ले करने में जिन बच्चों ने हिस्सा लिया उनमे से प्रत्येक की पार्ट निहायत ही खूबसूरत होने से फर्स्ट सेकंड या थर्ड तय करना मुश्किल था इसलिए सबको विजय घोषित करते हुवे प्रत्येक पार्टिसिपेंट बच्चों को ई सर्टिफिकेट से नवाजा गया इस अवसर पर आईपीएस के प्राचार्य नें ऑनलाइन माध्यम से ग्रुप मीटिंग आयोजित कर बच्चों से रूबरू होते हुवे अपने उद्बोधन में कहा कि जैसा कि सर्वविदित है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी व लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती 2 अक्टूबर को मनाई जाती है महात्मा गांधी सत्य व अहिंसा के बलबूते हमारे देश को अंग्रेजों से आजाद करवाने में अहम भूमिका निभाये, उन्होंने मानवीय गुणों को स्वयं में धारण करकर मानवीय गुणों के बलबूते ही इतनी बड़ी लड़ाई लड़ी तथा विजयी भी हुवे, अहिंसा का उनका विचार अभी भी कई मायनों में महत्वपूर्ण है। इस वर्ष भारत महात्मा गांधी की 151 वीं जयंती मना रहा है। और उनके विचारों पर फिर से विचार किया जाएगा और भारतीय जनता के महान नेता महात्मा गांधी जी द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लेंगे। बापू कहा करते थे आप मुझे बेडियों से जकड़ सकते हैं, यातना भी दे सकते हैं, यहाँ तक की आप इस शरीर को ख़त्म भी कर सकते हैं, लेकिन आप कदापि मेरे विचारों को कैद नहीं कर सकते। क्योकि विचार मन से निकलते हैं हमारे विचारों पर कोई बेड़ियां नहीं जकड़ी जा सकती भले इस तन में बेड़ियां जड़ दी जाए, बापू कहा करते थे मैं मरने के लिए तैयार हूं, पर ऐसी कोई वज़ह नहीं है जिसके लिए मैं मारने को तैयार हूं। क्योंकि बापू अहिंसा के पुजारी थे व भारतीय संस्कृति व धर्म अहिंसा ही सिखलाती है। जिसे बापू महात्मा गांधी जी ने सारी दुनियां के आगे प्रत्यक्ष किया उन्होंने बतलाया जहां पवित्रता है, वहीं निर्भयता है जहां प्रेम है वहां जीवन है। हमें स्नेह से व्यवहार करना चाहिए स्नेह वह शक्ति है। जिससे पत्थर के समान दिल वाला व्यक्ति भी रहम दिल मे तब्दील हो जाता है। महात्मा गांधी जो भी परिवर्तन देखना चाहते थे सर्वप्रतम उसे अपने आप में धारण करते थे एक मर्तबे कोई माताजी महात्मा गांधी जी के पास अपने बच्चे को लेकर आई और कहा कि गांधी जी यह शक्कर बहुत अधिक खाता है। कृपया इसे समझाएं कि यह अत्याधिक शक्कर का सेवन ना किया करें इस पर गांधीजी ने कहा कि आप मुझसे 1 सप्ताह बाद इसे लेकर मिलिएगा, महिला ने ऐसा ही किया 1 सप्ताह बीतने के उपरांत वह महिला बापू के समक्ष उस बालक को लेकर आयी और 1 सप्ताह पूर्व के बात को दोहराया कि इसके शक्कर अत्याधिक खाने की आदत को बंद करवाइए मेरा तो कहा यह मानता नहीं शायद आपका कहा मान ले इस पर गांधी जी ने बच्चे को बड़े प्यार से समझाया और वह बच्चा मान गया इस आश्चर्यचकित घटना को उसकी मां वही खड़ी हो देख स्तब्ध रह गई तब उस माता ने बापू से सवाल पूछे कि गांधी जी आप यह काम तो 1 सप्ताह पहले भी कर सकते थे परंतु आपने मुझे 1 सप्ताह पश्चात आने को क्यों कहा इस पर गांधी जी ने जवाब देते हुए कहा कि तब मैं खुद शक्कर खाया करता था अर्थात मेरे जीवन शैली में भी विभिन्न चीजों में शक्कर कि मात्रा हुवा करती थी अगर तब मैं इसे यह बात कहता तो वह प्रभाव इस पर नहीं पड़ता क्योकि तब मैं वह बाहर से कह रहा होता व अंदर से मन वैसा नाहोने से वह भाव नहीं आ पाते मगर अब मैं स्वयं शक्कर खाना छोड़ चुका हूं। और अब अपने अनुभव को संजोकर जब मैं इसे अत्याधिक शक्कर ग्रहण करने से मना कर रहा हूं। तब मेरे मुख से भी निकले बोल, व मन के भाव इस पर असर करेंगे इस तरह महात्मा गांधी जी प्रत्येक मानवीय गुण को पहले स्वयं में धारण करते थे फिर उसे बाहर प्रत्यक्ष करते थे उन्हें बाहर जिस तरह का भी परिवर्तन करना होता था वह परिवर्तन की शुरुआत सबसे पहले स्वयं के मन से निकले विचारों में किया करते थे वह इस बात के साथ जिया करते थे कि स्वयं में परिवर्तन ही विश्व परिवर्तन का आधार है। प्रायः लोग देश, राज्य, जिला या समाज को बदलने की बात किया करते हैं। परंतु लोग यह भूल जाते हैं। कि परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से होती है। अगर हम खुद ही नहीं बदले हैं। तो हम चाहे कितनी भी कोशिश कर ले हमें देख कर अन्य नहीं बदलने वाले और जो भी परिवर्तन हम बाहर देखना चाहते हैं। सबसे पहले अगर हम वह परिवर्तन अपने आप में लाते हैं। तो हमें देख अन्य भी उसको फॉलो करेंगे उस पर अमल करेंगे इसलिए कहा स्वयं में परिवर्तन ही विश्व परिवर्तन का आधार है। तभी कहा गया है हम बदलेंगे युग बदलेगा महात्मा गांधी जी को जब भी कोई समस्या घेर लेती थी तब वह श्रीमत भगवत गीता का पाठ किया करते थे व श्रीमत भगवत गीता में उन्हें उनके समस्या का हल मिल जाता है, चूंकि श्रीमत भगवत गीता स्वयं भगवान द्वारा उच्चारे गए महावाक्य को संजोकर बनाया गया है जो कि इनर क्वालिटी डेवलपमेंट में अहम भूमिका निभाता है, भारत के नागरिक इमोशनली इतने मजबूत इसलिए थे क्योकि भगवाम स्वयं भारत भूमि पर आकर विश्व परिवर्तन हेतु श्रीमत भगवत गीता रूपी गीत सुनाते हैं जिस श्रीमत भगवत गीता को जीवन मे धारण कर उसका प्रैक्टिकल उपयोग महात्मा गांधी जी जीवन मे किया करते थे इसी तरह आज महात्मा गांधी व लाल बजदूर शास्त्री की जयंती एक साथ होने से हम सब उन महापुरुषों के विचारों का अपने जीवन में अनुसरण करेंगे क्योंकि इंसान का पंच तत्वों से बना यह पुतला शरीर नष्ट हो जाता है पर विचारों में व्यक्ति की शख्सियत जीवित रहती है महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री जी जैसे महापुरुष आज भले ही हमारे सामने शारीरिक रूप से नहीं रहे पर विचारों में आज भी वह जीवित हैं सत्य व अहिंसा का मार्ग प्रसस्त करने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ना केवल भारतीय के लिए पिता समान है बल्कि सम्पूर्ण विश्व के पिता समान हैं जिन्होंने ना केवल भारतीयों के लिये बल्कि विश्व के प्रत्येक नागरिक के लिये सत्य व अहिंसा रूपी मार्ग को प्रैक्टिकल जीवन मे अमल कर इन मानवीय गुणों की शक्ति को सम्पूर्ण विश्व के सामने प्रत्यक्ष किया
आगे इंडस पब्लिक स्कूल दीपिका के प्राचार्य डॉ संजय गुप्ता ने बतलाया की आईपीएस दीपका लॉक डाउन के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई करवा रहा है वहीं विभिन्न तरह के सामाजिक गतिविधियां भी ऑनलाइन माध्यम से बच्चों को जोड़कर धरातल स्तर पर क्रियान्वित की जा रही है। कोविद 19 ने डिजिटल में अलग अलग स्थानों में रहकर एक साथ जुड़ने का मौका हमें दिया है हमें इस दौरान अपने मन को पॉजिटिव बनाये रखना है निश्चित ही सारे एहतियात बरतने हैं कोविद 19 से बचने के लिये पर अपनी पढ़ाई को प्रभावित नहीं होने देना है। चूंकि इस दौरान ऑनलाइन माध्यम ही सेफ है जिससे पढ़ाई जारी रखी जा सकती है तो हमें घर पर सुरक्षित रहते हुवे पढ़ाई पर भी ध्यान देना है साथ ही मानसिक, इमोशनली अपने आप को मजबूत बनाये रखना है और बढ़चढ़कर सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लेते रहना है