कोरबा:- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बड़े घोटाले से संबंधित धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत तलाशी अभियान चलाया और गिरफ्तारियां की जिसमें परिवहन किए गए प्रत्येक टन कोयले से 25 रुपये प्रति टन की अवैध वसूली की जा रही है।
ईडी ने गुरुवार को कोर्ट में सूर्यकांत तिवारी के मामले में रिमांड के आवेदन को पेश किया. ईडी ने आवेदन में दावा किया है कि सूर्यकांत तिवारी ने अधिकारियों की मदद से पिछले 16 महीनों में 500 करोड़ रुपए की अवैध कोयला लेवी जुटाई है और इस अवैध पैसे को चुनावी फंडिंग और अधिकारियों को रिश्वत देने के लिए इस्तेमाल किया गया. इसके लिए कोयले की ट्रांसपोर्टिंग में प्रति टन 25 रुपए का अवैध लेवी लगाया गया था.
ईडी ने तीन लोगों को किया गिरफ्तार
दरअसल तीन लोगों को रिमांड में लेने के लिए ईडी ने अपने रिमांड आवेदन में बताया की किस तरह लेवी का सिस्टम चलता था. लेवी को प्रशासन की मदद से कोयला खदानों में एजेंटों के नेटवर्क की मदद से जुटाया जा रहा था. इस मामले में ईडी ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. इसमें आईएएस अधिकारी समीर विश्नोई, व्यवसायी सुनील अग्रवाल और फरार व्यवसायी सूर्यकांत तिवारी के चाचा लक्ष्मीकांत तिवारी को रिमांड पर लिया गया है.
ईडी के 12-पेज के रिमांड आवेदन में कहा गया है कि “जबरन वसूली सिंडिकेट” एक सुनियोजित साजिश के रूप में चलाया गया था और डिलीवरी ऑर्डर (DO) खदान से कोयला ले जाने वाले ट्रक के लिए आवश्यक था, जो अवैध लेवी के भुगतान के बाद ही जारी किया जाता था. ईडी ने कहा है कि पैसे का इस्तेमाल सरकारी कर्मचारियों और राजनेताओं को रिश्वत देने के लिए किया जा रहा था और कहा कि इस पैसे के कुछ हिस्सों का इस्तेमाल चुनाव खर्च के लिए भी किया जा रहा था. हालांकि ईडी ने किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया.
गैर बीजेपी सरकार को अस्थिर करने के लिए डाली गई रेड
वहीं, ईडी की रेड पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का भी बयान सामने आया है. उन्होंने गुरुवार को सवाल किया कि रमन सिंह के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के दौरान भ्रष्टाचार की जांच क्यों नहीं हुई. सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि रेड गैर बीजेपी सरकार को अस्थिर करने के लिए डाली गई है. जिन राज्यों में बीजेपी सत्ता में नहीं है, वहां इसी तरह की रेड डाली जा रही हैं.
ईडी ने अपनी शुरुआती जांच का हवाला देते हुए कहा है कि अवैध लेवी के जरिए से जुटाए गए पैसे का एक बड़ा हिस्सा कई स्तर पर लेनदेन के माध्यम से किया गया था. इसे बेदाग धन के रूप में पेश करने के लिए और संपत्ति, कोल वाशरी के अधिग्रहण में निवेश कर मुख्य धारा में लाया गया. आईएएस अफसर समीर विश्नोई पर ईडी ने दावा किया है कि विश्नोई ने कोयला ट्रांसपोर्टिंग परमिट प्राप्त करने की पुरानी ऑनलाइन प्रक्रिया को बदलकर मैन्युअल किया है
विश्नोई के नाम पर जमा किये गए 50 लाख रुपए
ईडी ने कहा है कि आयकर विभाग को सूर्यकांत तिवारी के एक रिश्तेदार रजनीकांत तिवारी के आवास पर छापेमारी के दौरान एक डायरी मिली, जिसमें उल्लेख किया गया था कि 9 मार्च 2022 को रोशन कुमार सिंह के माध्यम से विश्नोई के नाम पर 50 लाख जमा किए गए थे. यह स्पष्ट है कि विश्नोई भी कोयले की अवैध उगाही के लिए रची गई साजिश का हिस्सा हैं.
हालांकि, विश्नोई के वकील सैयद जीशान ने दावों का खंडन किया और कहा कि मेरे मुवक्किल ने कानून के अनुपालन में भूविज्ञान और खननविभाग के निदेशक के रूप में सब कुछ किया और इसलिए कुछ भी अवैध नहीं है. उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल का किसी भी आरोपी से कोई संबंध नहीं है. वहीं गुरुवार को कोर्ट में सुनील अग्रवाल का बचाव करने आए वकील विजय अग्रवाल ने मीडिया को बताया कि इस तरह के अपराधों से निपटने का काम आयकर विभाग का था.
सूर्यकांत तिवारी ने बनाया व्यवस्थित सिंडिकेट
ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि सूर्यकांत तिवारी द्वारा कैश कलेक्टरों का एक व्यवस्थित सिंडिकेट स्थापित किया गया था, जिनकी पहुंच जिलामजिस्ट्रेटों के कार्यालयों तक थी. ईडी ने कहा कि कोई भी खनिक/ट्रांसपोर्टर एनओसी प्राप्त नहीं कर सकता था, जब तक कि वे इन कैश कलेक्टरों को पैसे का भुगतान नहीं करते थे. फिलहाल छत्तीसगढ़ में अभी भी ईडी की जांच पड़ताल जारी है. आने वाले दिनों में हो सकता है कि ईडी की तरफ़ से कोई बड़ा एक्शन देखने को मिले.
यह अनुमान है कि प्रतिदिन लगभग 2-3 करोड़ रुपये उत्पन्न होते थे, तलाशी एवं जांच के दौरान श्री लक्ष्मीकांत तिवारी के पास से 1.5 करोड़ रुपये नकद बरामद किया गया। उसने स्वीकार किया है कि वह रोजाना 1-2 करोड़ की जबरन वसूली करता था। एक बड़े कोयला व्यवसायी इंद्रमणि समूह के श्री सुनील कुमार अग्रवाल इस रैकेट में शामिल पाए गए और सूर्यकांत तिवारी का एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार पाया गया था। 2009 बैच के आईएएस अधिकारी श्री समीर विश्नोल और उनकी पत्नी के पास से 47 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी और 4 किलो के सोने के आभूषण पाए गए। सभी 3 व्यक्तियों को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया गया और रायपुर पीएमएलए विशेष न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जिसने 21.10.2022 तक 8 दिनों की ईडी हिरासत प्रदान की है। आगे की जांच जारी है।
बेल पर मुखिया अब बेलगाम हो गया
चंद पैसों के लिए भ्रष्ट अधिकारियों का गुलाम हो गया।यह लो @bhupeshbaghel ₹25 प्रति टन का साक्ष्य, आगे की कार्यवाही के लिए तैयारी कर लें साथ ही अब माफ़ी भी माँग लीजिए
सारे नाम सामने आयेंगे,
सारे भ्रष्टाचार उजागर होंगे
सच सामने आएगा
सब सामने आएगा pic.twitter.com/akkQTzYrrO— Dr Raman Singh (@drramansingh) October 14, 2022
रमन सिंह आपत्तिजनक बयानबाजी कर रहे: भूपेश
भूपेश बघेल ने कहा था कि डॉ. रमन सिंह आपत्तिजनक बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी और सोनिया गांधी का एटीएम कहा है। कोयले में प्रति टन 25 रुपये लेने का आरोप लगाया है। वे इसे प्रमाणित करें, नहीं तो सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। उन्होंने कहा कि “भ्रष्टाचार के अंतरराष्ट्रीय पितामह” ED के प्रवक्ता बने घूम रहे हैं। किस ‘जन-धन योजना’ से इतने गुना आपकी संपत्ति बढ़ गई। जवाब देने की हिम्मत दिखाइए…। केंद्र सरकार और भाजपा सेंट्रल एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है और रमन सिंह ईडी के प्रवक्ता बनकर घूम रहे हैं। उनको बताना चाहिए किसके घर में क्या मिला है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नान घोटाला, पनामा पेपर, चिटफंड घोटाला, प्रियदर्शनी बैंक घोटाला पर हमला बोलते हुए ईडी द्वारा जांच नहीं किए जाने पर सवाल उठाया।