नई दिल्ली:- सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही एक अहम फैसले में देशभर के प्राइवेट स्कूलों को आदेश दिया है कि लॉकडाउन के दौरान वे छात्रों से पूरी फीस नहीं वसूल सकते हैं। इसके साथ ही सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा है कि फीस का भुगतान नहीं करने की स्थिति में दसवीं बारहवीं के किसी छात्र का रिजल्ट भी नहीं रोका जाएगा और ना ही उन्हें कोई परीक्षा में बैठने से रोका जा सकता है।
इतना ही नहीं अदालत में स्कूलों से यह भी कहा है कि यदि कोई अभिभावक फ़ीसदी का भुगतान करने की स्थिति में नहीं है तो स्कूल उनके मामले पर गंभीर से विचार करेंगे और उनके बच्चों का रिजल्ट नहीं रोकेंगे। फिर यह भी माना है कि यह आदेश आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत नहीं दिया जा सकता क्योंकि इसमें यह कहीं भी नहीं है कि सरकार महामारी की रोकथाम के लिए शुल्क और फिर से अनुबंध में कटौती करने का आदेश दे सकती है। इस अधिनियम में प्राधिकरण का अदा के प्रचार-प्रसार की रोकथाम के उपाय करने के लिए अधिकृत किया गया है।
सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि लॉकडाउन के दौरान स्कूलों में बिजली पानी पेट्रोल-डीजल, स्टेशनरी, रखरखाव और खेलकूद के सामानों के पैसे बचा है। यह बचत करीब 15 फ़ीसदी के आसपास बैठती है। ऐसे में छात्रों से इन सब का पैसा वसूलना शिक्षा का व्यवसायीकरण करने जैसा होगा।