- वर्ल्ड फूड डे – स्वस्थ संतुलित हो आहार, एनर्जी दे शरीर को अपार, जैसा आहार वैसा विचार विद्यार्थी जीवन मे विचारों को श्रेष्ठ बनाना है। तो आहार का भी श्रेष्ठ, शुद्ध व सात्विक होना जरूरी है – डॉ संजय गुप्ता आईपीएस दीपका
21 वीं सदी का भारत बदलाओ तो होने चाहिए थे सकारात्मक मगर हुवे नकारात्मक अगर बात करें भोजन की तो गौर फरमाइए हमारे स्वास्थ्य के लिये भोजन की भूमिका कितनी अहम है। समय के साथ देखा देखी लोगों की फूड हैबिट बदलती गई। नेचरल चीजों की जगह, पैकेज्ड, स्टोर फूड ने ले लिया, मिट्टी के बर्तनों की जगह एल्युमिनियम या लोहे के बर्तनों ने ले लिया, कच्चे तेल की जगह रिफाइंड आयल ने ले लिया, हरे आयुर्वेदिक मसालों की जगह सूखे पिसे हुवे पैकेज्ड व स्टोर्ड मसालों ने ले लिया, जो भारत पवित्रता के लिए सात्विक अन्न, वेजिटेरिअन के लिये जाना जाता था उसकी जगह, वहां मिट मटन चिकन मांस खाना आम हो गया, जो भारत सात्विक अन्न के लिये जाना जाता था वह कब तामसिक भोजन लेने लगा समय के साथ परिवर्तन सभी ओर हुवा पर अफसोस कि परिवर्तन हमारे स्वास्थ्य के लिये सकारात्मक नहीं बल्कि नकारात्मक हुवा। आज कोई भी अन्न में स्वक्षता, पवित्रता नहीं रही सब टफ मिलावट से अन्न भी दूषित हो चला। आज से 3 से 4 दशक पूर्व पर गौर फरमाएं तो वह प्रकृति से मिली चीजों को उसी तरह ग्रहण करते थे जिस तरह प्रकृति ने दिया होता था। पर आज लोग उन चीजों को आग में मिर्च मसाले तेल के साथ इतना पकाकर खाने लगे कि उसके अंदर के पोषक तत्व ही हो गए व बिना पोषक तत्वों के भोजन में ताकत नहीं होने से लोगों को बीमारियां भी घेरने लगे
इंडस पब्लिक स्कूल के प्राचार्य डॉक्टर संजय गुप्ता से हुई परिचर्चा में उन्होंने बतलाया कि आज इंडस पब्लिक स्कूल दीपका द्वारा ऑनलाइन वेबिनार के माध्यम से बच्चों से रूबरू होकर उनके बीच सात्विक फूड को घर पर तैयार करने के लिये प्रेरित किया गया आज बच्चों को सात्विक अन्न के बारे में विस्तार से महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। आज बच्चों ने जाना कि सात्विक फूड से तन व मन दोनों ही स्वास्थ्य रहता है। मेटल की कढ़ाई की जगह मिठ्ठी के बर्तन में खाना पकाने से उसके स्वाद बने रहते हैं । जब हम मेटल के बर्तन में खाना पकाते हैं। तो मेटल खाने में अब्सॉर्ब होकर हमारे शरीर मे जाकर दुस्प्रभाव डालता है। जिससे हमारा शरीर रोगग्रस्त होने लगता है।आगे बच्चों ने जाना कि हमें अपने डेली फूड चार्ट में कम से कम मिर्च मसाले उपयोग करने चाहिए। पिसे हुवे धनिये के पाउडर की जगह हरि धनियां की पत्ती, लाल मिर्च पाउडर की जगह हरी मिर्च, नमक की जगह सेंधा नमक सब्जियों को आग में लिमिटेड समय तक ही पकाना चाहिए, रिफाइंड ऑयल की जगह कच्चे तेल का उपयोग करना चाहिए चूंकि रिफाइंड आयल से सारे पोषक तत्व निकल जाते हैं। और लोगों ने जाना प्रकृति ने जिन चीजों को जैसे दिया है उसमें ज्यादा बदलाओ ना करते हुवे उसे उसी रूप में ग्रहण करने से उसकी महत्ता बनी रहती है। जितना मॉडिफिकेशन करेंगे उतना उसकी गुणवत्ता में गिरावट आएगी, अगर सचमुच सब्जियों में सब्जियों का टेस्ट लेना है तो मिर्च मसाले तेल कम नगण्य मात्रा में उपयोग करने चाहिए, अन्यथा वास्तविकता यह है कि सब्जी की जगह अब तक हम मसालों का टेस्ट लेते आये हैं। ओरिजिनल सब्जी के टेस्ट से वंचित होते आये हैं। सब्जियों का बनाने का वैदिक तरीका, सात्विक तरीका यही है कि उसे पहला तो मिठ्ठी के बर्तन में कम आंच में पकाया जाए, ज्यादा नापकाया जाए जिससे कि उसकी गुणवत्ता कम हो जाये वहीं मिर्च, मसाले, तेल का नगण्य उपयोग किया जाए। जब हम सात्विक अन्न लेते हैं तब डाईजेशन महज 6 घण्टों में ही हो जाता है वहीं जब हम तेल मिर्च मसालों वाली सब्जी खाते हैं। तो डाइजेस्ट होने में 12 घण्टे लगते हैं। व शरीर मे उतनी ही गर्मी भी पैदा करते हैं। गर्मियों के सीजन में हमें वाटर मेलन की सलाद, खीरा की सलाद, खानी चाहिए व सब्जियों में परवल, लौकी मखना, तोरई की सब्जी खानी चाहिए वहीं ठंड़ीयों के मौसम में हमें मूली की सलाद, गाजर, शलजम, इत्यादि सलाद खाने चाहिए वहीं ठंड़ीयों में आलू, मेथी, बिन्स, गोभी मटर साग सब्जी खानी चाहिए। हमें फ्रीज में एक दो दिन तक स्टोर किया हुवा भोजन नहीं करना चाहिए। यह स्वास्थ्य के लिये हानिकारक होता है। यहां तक कि हमें तुरंत बने गर्मागर्म भोजन ही करने चाहिए। भोजन को पुनः गर्म कर खाने से भी उसकी गुणवत्ता कम होती है।
बच्चों ऑनलाइन सात्विक अन्न के क्लासेस से रेसिपीस सीखकर उसे अपने अपने घर मे ट्रायल किया किसीने सात्विक रोटी बनाई तो किसने, सात्विक सलाद, किसी ने सात्विक सब्जी बनाई, तो किसी ने डिटॉक्स जूस डिटॉक्स सलाद, डिटॉक्स सुप वहीं किसीने सात्विक खिचड़ी बनाई तो किसीने प्रोटीन रिचर्ड सलाद, किसीने, अंकुरित चने दाल का मिक्स वेज बनाया, किसीने वेजिटेबल सुप, किसीने दूध में मखाना व खसखस मिश्री मिलाकर कैल्शियम रिच्ड़ मिल्क शेक तो वहीं किस बच्चे ने दलिया की खिचड़ी बनाई तो किसीने मूंग की खिचड़ी, किसी ने सात्विक चाय बनाकर दिखलाए तो किसीने लाइम जूस इस तरह आज बच्चों ने अपने घर पर अपने माता के सहयोग से आज की एक्टिविटी पूरी की उम्मीद करते हैं कि उनके परिवार के सदस्य भी सात्विक अन्न की महत्ता को एक्सेप्ट करेंगे व अपने जीवन शैली में उसे शामिल करेंगे, सबकुछ जानते समझते हुवे भी ऐसे प्रोडक्ट जो हमारे शरीर के लिये नुकसानदायक हैं उन्हें बेवजह का बढ़ावा देना, व रोगों को आमंत्रित करना समझदारी नहीं, वहीं विद्यार्थी जीवन मे नॉन वेज की जगह वेजिटेरिअन फूड की महत्ता भी बतलाई गई कि किस तरह फूड हमारे व्यवहार को भी प्रभावित कर सकता है। जिस मांस को हिंसा कर काटकर पकाकर भोजन के रूप में प्लेट में परोशा जाता है। उसमें नेगेटिव वाइब्रेशन निहित होते हैं । जब हम उनका सेवन करते हैं । तब हमारे मन के भाव भी नेगेटिव होते जाते हैं। इसलिय विद्यार्थियों को चाहिए कि अपने जीवन शैली में सात्विक अन्न को बढ़ावा दे, जितना सादा जीवन होगा, ज्ञान बुद्धि में उतनी अच्छी रीति धारण होगा। क्योकि जैसा अन्न वैसा मन जैसी पानी वैसी वाणी खाने पीने की चीजों का प्रभाव हमारे मन पर पड़ता है। हमें चबाचबाकर भोजन करना चाहिए, भोजन करते समय बात नहीं करना चाहिए टीवी नहीं देखना चाहिए, चलते हुवे भोजन नहीं करना चाहिए, मोबाइल का उपयोग भोजन के समय नहीं करना चाहिए, भोजन के समय सिर्फ भोजन करना चाहिए पूरी एकाग्रता के साथ, स्वाद ले लेकर भोजन करना चाहिए आजकल लोग कम चबाकर भोजन खाने की आदत डालें हुवे हैं। जिससे विभिन्न तरह के पेट सम्बन्धित विकार उत्तपन्न होते जा रहे हैं। वहीं अपच, गैस्ट्रिक की समस्या आम हो चली है वजह खान पान ही है अत्यधिक मिर्च मसाले युक्त भोज्य पदार्थ नुकसानकारक होते हैं। हम रात को सोने से लहले अत्यधिक भोजन नहीं लेना चाहिए इससे नींद में तकलीफ होगी, भारीपन की वजह से जल्दी नींद ना आने से सुबह देर में नींद खुलेगी, हमें सुबह जल्दी उठना चाहिए, इसमे लिए रात को जल्दी सोने की आदत भी डालनी चाहिए। बाजार से सब्जियां लाने के पश्चात उसे अच्छे से पानी से धोना चाहिए। केमिकल युक्त कीटनाशक के प्रयोग से उपजाई गईं सब्जियों शरीर में टॉक्सिन्स का प्रवाह करती है व हनिकारक होती है। ऐसे सब्जियों से परहेज करना चाहिए। अंकुरित चीजों को सेवन करना चाहिए। काजू किसमिस छोहारे बादाम इत्यादि का सेवन करना चाहिए बाहर के जनक फूड से बचना चाहिए। आज के बच्चे बाहर के पैकेज्ड फूड की ओर आकर्षित होते हैं। जो शरीर के लिये व माइंड के लिए अत्याधिक नुकसानकारक होता है। इसलिय हमें जंक फूड का सेवन नहीं करना चाहिए, सुबह मॉर्निंग वॉक, रनिंग, एक्सरसाइज, योगा, मैडिटेशन को जीवन शैली में शामिल करना चाहिए जिससे कि एक्स्ट्रा कैलोरी बर्न हो सके। जब भूख लगे तब ही खाना चाहिए, समय पर खाना चाहिए चाय की जगह सात्विक चाय पीना चाहिए कॉफी अवॉयड करनी चाहिए।
आगे डॉक्टर संजय गुप्ता ने बतलाया कि भोजन पर अटेंशन अत्यंत ही आवस्यक है। विद्यार्थी जीवन मे खासकर सात्विक अन्न को लेकर बच्चों व उनके परिजन में जागरूकता जरूरी है। सबको पता है। भोजन की हमारे तन मन ब्रेन के विकास में कितनी महत्ता है। बच्चों व परिजनों में सात्विक अन्न के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से वर्ल्ड फूड डे के अवसर पर आज की सात्विक डाइट पर आधारित सात्विक भोजन बनाने की एक्टिविटी रखी गई थी जिसमे विद्यालय के बच्चों ने सर्वप्रथम वेबिनार के माध्यम से वर्ल्ड फूड डे के अवसर पर सात्विक अन्न की महत्ता को समझा तत्पश्चात उसे अमल करने के लिये व जीवन शैली में शामिल करने के लिये आज से ही घर पर अपने परिजनों व बड़े भाई बहनों की मदद से सात्विक फूड कुकिंग की प्रैक्टिस की व उन सात्विक भोज्य पदार्थों का सेवन कर थीम को अमल में लाये, उन तमाम परिजनों का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने लॉक डाउन के दौरान विद्यालय द्वारा आयोजित सात्विक फूड कुकिंग गतिविधि में हिस्सा लेकर अपने तथा बच्चों के स्वास्थ्य को और भी बेहतर बनाये रखने के लिये जागरुकता लाने में सहभागिता निभाई ज्ञात हो कि इंडस पब्लिक सचिओल5 इस तरह की गतिविधियां निरन्तर करवाता ही रहता है। आईपीएस का लक्ष्य बच्चों को केवल डिग्रियां प्रदान करना ही नहीं बल्कि उनका सर्वांगीण विकास करना भी है। जिसके तहत ही आज वर्ल्ड फूड डे के अवसर पर सात्विक फूड कुकिंग एक्टिविटी का आयोजन रखा गया था जिसमे बच्चों व उनके परिवार के सदस्यों ने भी सहभागिता निभाई