• खेलने कूदने का लो संकल्प स्वस्थ्य रहने का यही विकल्प – डॉ संजय गुप्ता (आई.पी.एस. दीपका)
  • LOCKDOWN के दौरान प्रत्येक को PHYSICAL, MENTAL, EMOTIONAL तौर पर FIT रहना SOCIAL RESPONSIBILITY – डॉ संजय गुप्ता आई.पी.एस. दीपका
  • पढ़ोगे लिखोगे होगे कामयाब साथ साथ समय समय पर खेलोगे कूदोगे बनोगे नवाब – डॉ संजय गुप्ता (आई.पी.एस. दीपका)

कोरबा:- इंडस पब्लिक स्कूल दीपका के प्राचार्य डॉ संजय गुप्ता नें National Sports Day के अवसर पर लॉक डाउन के दौरान लोगों को शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, इमोशनल, आध्यात्मिक तौर पर हर एस्पेक्ट से हेल्दी रहने के ट्रिक्स देते हुवे सामाजिक उत्थान हेतु प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बतलाया की लॉक डॉउन के दौरान समस्त लोगों को शारीरिक रूप से मानसिक रूप से इमोशनली आध्यात्मिक रूप से व सामाजिक रूप से अपने आप को हेल्दी रखना अत्यंत ही आवश्यक है प्राणायाम योगा अन्य फिजिकल एक्सरसाइज के माध्यम से लोग सुबह उठकर प्रातः टहलने या फिर दौड़ने की आदत अपने जीवन शैली में शामिल करनी चाहिए इससे लोगों का शरीर शारीरिक रूप से स्वास्थ्य होगा साथ ही मानसिक रूप से अपने आप को सशक्त बनाने के लिए रोजाना स्पिरिचुअल नॉलेज तथा मेडिटेशन अपने जीवन शैली में शामिल करने की सलाह दिए अपने आप को आध्यात्मिक तौर पर सशक्त करने के लिए हमें डिवाइन नॉलेज, स्पिरिचुअल नॉलेज रोजाना सुबह-सुबह अपने मन में भरना चाहिए चूंकि सबसे ज्यादा पॉजिटिव स्पिरितुअल नॉलेज होता है जिसे पढ़ने सुनने से आध्यात्मिक तौर पर शशक्त होंगे, जिस तरह शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हेल्दी डाइट अच्छे भोजन लेने की आवश्यकता होती है बिल्कुल उसी प्रकार हमारे मन को हेल्थी रखने के लिए अच्छे विचारों की आवश्यकता होती है और अगर सुबह-सुबह अच्छे विचार के तौर पर स्पिरिचुअल नॉलेज पढ़ि या सुनी जाए तो इससे मानसिक सशक्तिकरण होता है साथ ही ऐसे विपरीत परिस्थिति में हमें अपने मन की स्थिति को स्टेबल रखने की अत्यंत ही आवश्यकता है, परिस्थितियां जो है वह बाहर की स्थिति है बाहर की स्थिति से हमें अपने मन को बचा कर रखना है, क्योंकि हमारे मन की स्थिति को बनाए रखना हमारे हाथ में है बाहर की स्थिति को बदलना हमारे हाँथ में नहीं, हम क्या सोचे यह हम पर निर्भर करता है, मगर बाहर आई परिस्थिति की वजह से अगर हम बारंबार नेगेटिव विचार उत्पन्न करते हैं तो अपने आप को डिप्रेशन की तरह ढकेलते जाते हैं, तो हमें अपने आपको मानसिक तौर पर आध्यात्मिक तौर पर सशक्त करने की भी जरूरत है इस तरह से हमें अपने आप को हर एंगल से स्वस्थ रखने की आवश्यकता है लोगों के साथ हमारे जो संबंध हैं वह भी हेल्दी होने चाहिए ऐसा ना हो कि बाहर आई परिस्थिति की वजह से मन में आए डिप्रेशन की अवस्था में हम अपने आसपास के सगे संबंधियों रिश्तेदारों के साथ विपरीत व्यवहार करते हुए उनसे संबंध खराब कर ले ऐसा लॉकडाउन में संभव है तो हमें अपने आप को इमोशनल तौर पर फिट रखने की आवश्यकता है, एकांत में ज्यादा रहकर आत्मचिंतन करने की आवस्यकता है, जिस तरह शारीरिक स्वस्थ्य, मानसिक स्वस्थ्य, आध्यात्मिक स्वस्थ्य सामाजिक स्वस्थ्य होना आवश्यक है बिल्कुल उसी प्रकार हमें अपने आप को इमोशनल तौर पर भी स्वस्थ रहना है क्योंकि बाहर की परिस्थितियां हमें इमोशनली नेगेटिव सोचने पर मजबूर करेंगी पर अगर हम इमोशनली स्ट्रांग है तो जरूर बाहर की परिस्थिति हमारे मन की स्थिति को छू भी नहीं पाएगी और सामने आई वैश्विक त्रासदी रूपी समस्या का प्रभाव हमारी मन की स्थिति पर नहीं पड़ेगा इस दौरान हमें अपने आप को अनुशासन में चलाने की अत्यंत आवश्यकता है हमें सुबह से रात तक आने लिए टाइम टेबल बनाने की आवस्यकता है, जिस तरह खेल खेलते समय खेल में आई विभिन्न तरह की समस्याओं का हमेशा सामना करना पड़ता है तो यह जीवन को भी एक खेल समझना चाहिए और मौजूदा समय में जो वैश्विक त्रासदी आई है अगर हम उसे साक्षी भाव, इस सिचुवेसन को डिटैचड होकर देखते हैं तो फिर परिस्थिति का प्रभाव हमारी मन की स्थिति पर नहीं पड़ेगा इस दौरान हमें आत्मिक रूप से सशक्त होने की आवश्यकता है हमें अपनी आंतरिक शक्तियों को हर मूवमेंट में इस्तेमाल करने की जरूरत है हमारी आंतरिक शक्तियों में विस्तार को सार करने की शक्ति तथा सार को विस्तार करने की शक्ति इसके अलावा सहयोग की शक्ति इसके अलावा समाने की शक्ति उसके पश्चात सामना करने की शक्ति साथ ही सहन शक्ति व परखने की शक्ति निर्णय करने की शक्ति इस तरह से हमारे अष्ट शक्तियों का अभी परीक्षा का समय है हर क्षण एक परीक्षा प्रत्येक मानव जीवन को देनी पड़ रही है क्योंकि आमतौर पर हम गौर फरमाएं तो पाएंगे कि प्रत्येक मानव के जीवन में कुछ न कुछ समस्याएं आती ही रहती थी और आज यह वैश्विक त्रासदी के रूप में जो समस्या आई है तो निश्चित तौर पर हमें किसी न किसी रूप से मानसिक या शारीरिक रूप से सशक्त बनाने आए हैं वह हममें जो आंतरिक कमियां है उन कमियों को निकालकर हमें गुणों का दान करने आई है या कहें कि हमें हम से मिलाने आई हैं हमें हमारी शक्तियों से रूबरू करवाने आई है, हमें हर परिस्थिति में एडजस्ट करना सिखलाने आई है, कोई कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता यह सिखलाने आई है, अगर इन छोटी-छोटी बातों पर गौर फरमाएं तो इसके आगे आने वाली चाहे विपरीत परिस्थिति इससे भी बड़ी क्यों ना हो हम उसका सामना और भी आसानी से कर पाएंगे क्योंकि अभी हम जिस तरह से मानसिक उथल-पुथल से गुजर रहे हैं यह हमें मानसिक तौर पर सशक्त कर रहा है जिसका इफेक्ट long-term में हमें नजर आएगा क्योंकि अभी हम जिस दर्द को हम पल पल झेल रहे हैं, महसूस कर रहे हैं तो इस दर्द के पीछे पीछे भविष्य के फायदों को देख पाना मुश्किल है क्योंकि समय जिस किसीके साथ भी जो भी परीक्षा लेता है उसके पीछे उस व्यक्ति विशेष का कल्याण छुपा होता है जो एक लंबे समय के पश्चात उस कल्याण को समझ पाते हैं, की अमुख चीजे जो हमारे साथ गलत हुई उसकी वजह से हमें क्या लाभ हुवा इसको लंबे समय पश्चात समझ पाते हैं इसलिए कहा गया है कि जो होता है अच्छे के लिए होता है या जो हुआ अच्छा हुआ जो हो रहा है अच्छा हो रहा है और जो होगा वह भी अच्छा होगा यह कुदरत का नियम है हालांकि अभी हमें विभिन्न तरह की मानसिक उथल-पुथल के दौरान अनेक तरह के दर्द जरूर महसूस हो रहे हैं मगर आगे चलकर हमें उन प्रत्येक दर्द के हिसाब किताब के तौर पर आसानी से समझ में आएगा कि हमें उस दर्द के बदले क्या मिला, क्या प्राप्ति हुई, निश्चित तौर पर हम आंतरिक रूप से सशक्त हो रहे हैं, पिछले तीन दशकों में मानव बाहरी तौर पर अपने आप को सशक्त करता गया परंतु आंतरिक तौर पर खोखला होता गया लोग आत्मनिर्भर होने की बजाय दूसरों पर निर्भर होते गए डिपेंडेंसी की आदत लोगों की बढ़ती चली गई परंतु आज इस वैश्विक त्रासदी के दौरान जब लोग अपने अपने घरों में लॉकडाउन है इस दौरान हर छोटी से छोटी कार्य को उन्हें स्वयं ही करना पड़ रहा है लोग इन छोटे-छोटे स्तर पर आत्मनिर्भर बन रहे हैं और जब आत्मनिर्भर की भावना मन में पनप जाएगी और जब आगे चलकर हमें जीवन में मौके बड़े मिलेंगे तो निश्चित तौर पर हम किसी अन्य पर अपने उस कार्य को अंजाम देने के लिये निर्भर नहीं रहेंगे बल्कि खुद शुरू करेंगे खुद खत्म करेंगे अपने कार्य के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहेंगे और जो हमें इस जीवन में आगे बढ़ाने पर सहयोग प्रदान करेगा आज जो परिवार जो कभी एक दूसरे से इमोशनल तौर पर अलग-अलग रहा करते थे दूरी बना कर रहा करते थे आज इस वैश्विक त्रासदी के दौरान सभी एकत्रित रूप से आपस में एक दूसरे को इमोशनली स्ट्रांग करते नजर आ रहे हैं प्रायः सभी परिवारों में संबंधों में मिठास आता नजर आ रहा है, तो सचमुच यह कुदरत का स्पोर्ट्स डे चल ही रहा है और कुदरत से सीखते हुए हमें भी स्पोर्ट डे के अवसर पर उन पहलुओं पर गौर फरमाना चाहिए जो इस वैश्विक त्रासदी के दौरान खेल खेल में हम जिन बारीकियों को सीख रहे हैं, जिसको हम आज से पहले नहीं किए थे वह अब कर रहे हैं निश्चित तौर पर भविष्य में हमारे लिए लाभदायक ही रहेगा हमें आंतरिक तौर पर मजबूत बना रहा है यह समय हमारे अंदर के हिचकिचाहट को छोटे बड़े कार्य करवाकर मिटा रहा है यह समय तो यह एक अपॉर्चुनिटी के तौर पर लेने की जरूरत है अगर हम समस्याओं के संबंध में ही सोचते रहेंगे तो समस्याएं हमें जो सीख प्रदान करने आई है उससे वंचित रह जाएंगे तो अपना ध्यान आई हुई समस्याओं से हटाकर उसके समाधान में लगाएंगे तो समाधान भी निकलेगा और दूसरा हमें सीख की प्राप्ति भी होगी और वही सीख हमें शक्ति बनकर भविष्य में फिर कभी जब समस्या आएगी तो जिसका इफेक्ट लॉन्ग टर्म में तब हमें नजर आएगा क्योंकि अभी हम जिस दर्द को झेल रहे हैं तो अभी भविस्य के उन लाभों को देख पाना मुश्किल है क्योंकि समय जिस किसी के साथ जोभी परीक्षा लेता है उसके पीछे उस व्यक्ति विशेष का कल्याण छुपा होता है जो एक लंबे समय के पश्चात उस कल्याण को समझ पाते इसलिए कहा गया है कि जो होता है अच्छे के लिए होता है या जो हुआ अच्छा हुआ जो हो रहा है अच्छा हो रहा है और जो होगा वह भी अच्छा होगा यह कुदरत का नियम है हालांकि अभी हमें मिल रही मानसिक उथल पुथल के दौरान अनेक तरह के दर्द जरुर महसूस हो रहे हैं मगर आगे चलकर उनका लाभ भी दिखाई देगा चूंकि कोई सा भी अनुभव व्यर्थ नहीं जाता और एक बार हमारे द्वारा जबरन सीखे गई अनुभव एक बार व्यर्थ जा सकते हैं पर जिन्दगु जो कुछ सिखलाती है उसके पीछे हमारा बहोत बड़ा कल्याण छुपा होता है , मौजूदा आई वैश्विक त्रासदी यह जिंदगी खेल है इसे खेल समझकर खेलिए सारे अनुशाशन का पालन कीजिये सारे नियमों का पालन कीजिए अपने लिये कभी समय नहीं निकाल पाते थे अब मील एकांत को सकारात्मक रूप से इस्तेमाल कीजिये इस दौरान विद्यालय के बच्चों ने भी अपने परिवार के सदस्यों के साथ बिताए गए पल के तस्वीर विद्यालय के व्हाटसअप नम्बर पर सांझा किये हैं जिसे आप सभी से सांझा करते हुवे अत्यंत ही खुशी हो रही है आशा करते हैं कि आप सभी जीवन की परीक्षा में उत्तीर्ण हों व आगे पुनः इसी तरह मुलाकात होगी रहेगी कुछ ज्ञानवर्धक सामाजिक उत्थान हेतु बातों के साथ