- खेल-कूद बनाते है मनुष्य को अरोग्य, शक्ति संचार करके शरीर को बनाते हैं सुयोग्य – डॉ संजय गुप्ता आई.पी.एस. दीपका
- खेल तराशते हैं मानव क्षमता की शक्ति, इसके द्वारा विशेष बने जाते है साधरण व्यक्ति – डॉ संजय गुप्ता आई.पी.एस. दीपका
- लॉकडाउन के दौरान प्रत्येक को स्वयं को शारीरिक, मानसिक, इमोशनल रूप से फिट रखना सोशल रिस्पांसिबिलिटी – डॉ संजय गुप्ता आई.पी.एस. दीपका
कोरबा:- राष्ट्रीय खेल दिवस – नेशनल स्पोर्ट्स डे के अवसर पर इंडस पब्लिक स्कूल दीपिका द्वारा विद्यालय के बच्चों तथा उनके परिजन व परिवार के अन्य सदस्यों के साथ तन, मन को स्वस्थ्य, जीवन को सुखी बनाये रखने के विषय ऑनलाइन वेबीनार का आयोजन कर स्पोर्ट्स, योगा तथा व्यायाम की महत्ता के संदर्भ में विस्तृत परिचर्चा रखी गई
इंडस पब्लिक स्कूल दीपका के प्राचार्य डॉ संजय गुप्ता नें सामाजिक उत्थान हेतु प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बतलाया की आज 29 अगस्त राष्ट्रीय खेल दिवस( National Sports Day) के रूप में मनाया जाता है, खेल दिवस का मुख्य उद्देश्य एक व्यक्ति के जीवन में खेल की भूमिका खेल की महत्ता के बारे में सामाजिक जागरूकता बिखेरना होता है, अगर इस दिवस के इतिहास पर गौर फरमाएं तो मेजर ध्यानचंद नामक दिग्गज हॉकी खिलाड़ी के द्वारा भारत को उनके हॉकी खेल रूपी टैलेंट के द्वारा गौरवान्वित किया गया, हमारे देश का नाम उनके प्रतिभा द्वारा बहोत ऊंचा किया गया जिनके यादगार स्वरूप 29 अगस्त को, उनके जन्मदिन के अवसर पर राष्ट्रीय खेल दिवस के तौर पर मनाया जाता है, आगे इंडस पब्लिक स्कूल के प्राचार्य डॉक्टर संजय गुप्ता ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में बतलाया कि आज विद्यालय के बच्चों नें तथा उनके परिजनों नें व परिवार के अन्य सदस्यों से खेल के महत्व के संदर्भ में अनेकों महत्वपूर्ण जानकारियां हांसिल की वैसे तो सभी खेल की महत्ता से वाकिफ होते हैं फिर भी उन जरूरी बातों को मन में धारण कर खेल को जीवन शैली में रोजाना शामिल करने के उद्देश्य से यह आयोजन रखा गया था जोकि लॉक डाउन के दौरान लोगों को हैप्पीनेस मूमेंट का अहसास करा सकें, आंतरिक सन्तुष्टता की अनुभूति करवा सके, आज के वेबिनार में जीवन में खेल किस तरह से आवश्यक है यह बच्चों को बतलाया गया सबसे पहले बच्चों ने जाना कि खेल खेलने के लिए जरूरत होती है Passion की Confidence की Concentration की परस्पर CO-OPERATION की Team Spirit की, DECISION MAKING POWER की सहनशक्ति की, आज्ञा का पालन किए जाने की, परखने की शक्ति की इस तरह से खेल व जीवन मे समानता यह है कि जीवन में आने वाली विभिन्न तरह की परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति भी खेल सिखलाती है या कहें जीवन जीने हेतु आवश्यक शक्तियों की जागृति खेल खेलने से प्राप्त होती है, किसी भी खेल को खेलने के लिए मन में उमंग उत्साह का होना अत्यंत ही आवश्यक है ठीक उसी प्रकार मानव जीवन को जीने के लिए भी उमंग उत्साह का होना अत्यंत ही आवश्यक है बिना उमंग व उत्साह के निराशा पूर्ण जीवन जीने से मानव नकारात्मकता की और अपने आप को धकेलता जाता है व विभिन्न तरह के मानसिक रोगों से घिर जाता है, इसलिए अपने आप को खाली समय में व्यर्थ नेगेटिव विचारों से अपने मन को बचाने के लिए, अपने आप को खेल में बिजी रखना मन के मनोरंजन हेतु भी लाभप्रद होता है साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य व शारीरिक स्वास्थ्य खेल के माध्यम से प्राप्त होता है, खासकर आउटडोर गेम्स जहां इंडोर गेम्स मेंटल कसरत करवाते हैं वही आउटडोर गेम मानसिक व शारीरिक दोनों तरफ से कसरत करवा कर हमें तन व मन से स्वस्थ रखते हैं और जब हम खेल खेलते हैं तब हमारे टीम में जब कभी भी जो कोई खिलाड़ी होते हैं तो हमें आपस में एक दूसरे को सहयोग करने की भावना मन में उत्पन्न करनी पड़ती है, और परस्पर सहयोग से टीम स्पिरिट की भावना जागृत होती है, जैसे इस वैश्विक त्रासदी के दौरान सभी घरों में लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं, यह भी जीवन मे आया एक तरह का कुदरती खेल है जिसमे हमें अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य को मानसिक तौर पर परस्पर एक-दूसरे को सहयोग करते हुए मन को मजबूत बनाए रखने में व सामने आई परिस्थिति का सामना करने में सहयोग प्रदान करते हुवे पूरी टीम के साथ जिस तरह टीमस्पिरिट की भावना खेल के दौरान होती है ठीक उसी प्रकार इस लॉकडाउन की परिस्थिति के दौरान हमें अपने परिवार के सदस्यों के बीच टीम स्पिरिट की भावना रखनी है, वहीं परिवार के मुखिया को लीडरशिप की क्वालिटी की परीक्षा इस लॉक डाउन के दौरान देखने को मिल रही है जहां उन्हें परिवार रूपी टीम के प्रत्येक सदस्यों की जरूरतों को पूरा करते हुवे सबका ख्याल रखते हुवे सबको लीड कर लीडरशिप स्किल डेवेलप करनी है, आमतौर पर हम बाहरी दुनियां में देखते थे की स्वार्थी हो चले थे, दूसरों को सहयोग प्रदान करना आज लोग भूल चुके हैं तो खेल हमें परस्पर सहयोग की भावना हमारे मन में धारण करने के लिए कारगर तरीका है वही खेल खेलने के लिए जरूरत होती है आत्मविश्वास की पैशन की लक्ष्य की क्योंकि बिना आत्मविश्वास के कोई भी खेल में जितना संभव नहीं ठीक उसी प्रकार सामने आई वैश्विक त्रासदी से लड़ने के लिए प्रत्येक के मन में आत्मविश्वास का होना आवश्यक है ऐसी विपरीत परिस्थिति से सामना करने के लिए आंतरिक तौर पर अपने आप पर विश्वास रखने की आवश्यकता है कि इस परिस्थिति का सामना कर हम सामने आने वाली हर परिस्थिति को क्रॉस कर लेंगे आज हमारा लक्ष्य हर हाल में सामने आई वैश्विक त्रासदी के दौरान अपने मन को स्टेबल बनाए रखकर इस परीक्षा की घड़ी को क्रॉस करना है जिसके लिए आंतरिक Passion का होना अत्यंत ही आवस्यक है, खेल को खेलने हेतु स्वयं में आत्मविश्वास का होना आवश्यक है कि हां मैं यह कार्य कर सकता है इस तरह के पॉजिटिव संकल्प हमें खेल में सबसे अलग व सबसे अच्छा प्रदर्शन किए जाने हेतु स्वयं को प्रेरित करते हैं स्वयं को मोटिवेट करते हैं इससे सेल्फ मोटिवेशन की भावना उत्पन्न होती है ठीक इसी प्रकार जीवन रूपी खेल में मौजूदा वैश्विक त्रासदी में भी हमें सेक्फ मोटिवशन की आवश्यकता है जहां हर कदम एक चैलेंज है हमें जीवन को जीने के लिए अन्य लोगों से आत्मविश्वास जागृत करवाने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए क्योंकि एक खिलाड़ी सेल्फ मोटिवेशन की इस टेक्निक को भलीभांति जानता है कि अपने आप को जागृत या अपने आत्मविश्वास को कैसे बढ़ाया जाए सेल्फ मोटिवेशन कैसे किया जाए और जो सेल्फ मोटिवेट होता है वह अपने आप को चाहे जिस दिशा में भी मोड सकता है, जैसे आज समय व परिस्थिति के अनुसार जरूरत है लोगों को अपने आप को एडजस्टेबल बनाते हुवे परिस्थिति अनुसार अपने आदतों को संस्कारों को मोल्ड करके परिस्थिति अनुसार अनुकूल बनने की अन्यथा यह विपरीत परिस्थिति हमारे मन को निराश हताश बना देगी, वहीं जिस प्रकार खेल में एक पैशन की जरूरत होती है एक लक्ष्य की जरूरत होती है, ठीक उसी प्रकार जीवन में भी अनेकों तरह के लक्ष्य होते हैं जिन लक्ष्यों के प्राप्ति के लिए अंदर से एक पैशन की जरूरत होती है आज वैश्विक त्रासदी को जितना सबका लक्ष्य है जिसके लिये मन में जोश Passion का होना अत्यंत आवश्यक है, आज लोग ग्राउंड में कम व इंडोर गेम में ज्यादा समय व्यतीत करते हैं तो इस तरह के गतिविधियों से हमारा शारीरिक विकास पूर्णतया नहीं हो पाता नित्य युवाओं में तरह तरह के पैदा हो रहे रोग, क्योंकि अब खेल-कूद पर ध्यान नही दे रहे युवा लोग। अगर हम गौर फरमाए दो से तीन दशकों पहले लोग फिजिकल काम ज्यादा किया करते थे तो उन्हें खेलों की जरूरत बचपन मे मनोरंजन के पड़ती थी बड़े होने उपरांत नहीं पर समय के साथ साथ जैसे जैसे फिजिकल काम कम होते गए जीवन में खेलों की महत्ता इसलिए बढ़ती गई क्योंकि खेल शारीरिक व्यायाम भी करवाते हैं जिससे शारीरिक रूप से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है साथ ही साथ पिछले एक दशक में लोगों की कार्यप्रणाली में इस कदर बदलाव आए हैं कि लोग प्रोफेशनल काम काज में इतने उलझ गए हैं कि लोगों को अपने आप के लिए भी समय नहीं लोग अपने स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रख पा रहे हैं चाहे वह मानसिक स्वास्थ्य हो या फिर शारीरिक स्वास्थ्य हो या फिर इमोशनल स्वास्थ्य हो आज जब वैश्विक त्रासदी हमारे बीच आई हुई है यह एक चैलेंज बनकर जो परख रही है हमारे आंतरिक इम्यूनिटी पावर को प्रायः खिलाड़ियों का इम्यूनिटी पावर बहुत ही अच्छा होता है रोगों से लड़ने की क्षमता खिलाड़ियों की बहुत अच्छी होती है, इसलिए खिलाड़ी अन्य नॉर्मल व्यक्ति की अपेक्षा कम बीमार पड़ते हैं, वही शरीर में रक्त के परिसंचरण हेतु खेल आवश्यक है, साथ ही साथ पाचन शक्ति को बढ़ाने हेतु भी दौड़ना शरीर को स्वस्थ लाभ प्रदान करता है व रक्त परिसंचरण मैं बैलेंस बनाए रखता है, खेलों से श्वसन प्रणाली स्वस्थ रहती है, स्केलेटन सिस्टम फ्री होकर अच्छे से काम करते हैं, एक खिलाड़ी को बुढ़ापा जरा देर से आता है, आज के दौर में लोगों को कम उम्र में ही में ही बुढ़ापा नजर आने लगा है, जिसकी एक वजह अपने जीवन में खेल को ना शामिल करना भी है क्योंकि खिलाड़ी का स्किन सदा तरोताजा, स्वस्थ्य, जवां रहता है अंदर से उमंग उत्साह खिलाड़ी के मन में बने रहने से उसकी स्किन की सुंदरता ज्यादा समय तक बरकरार रहती है वही जो खेल में भाग नहीं लेते वह जल्द ही बूढ़े नजर आने लगते हैं, क्योंकि उनमें अंदर से उमंग व उत्साह की कमी होती है जो आगे चलकर जीवन में भी निराशा उत्पन्न करने लगती है, एक खिलाड़ी का मनोबल आंतरिक तौर से जागृत होता है, जो उसे आगे चलकर जीवन में आई विभिन्न परिस्थितियों में मन की स्थिति को बैलेंस करने हेतु प्रेरित करता रहता है, खेल खेलने से लीडरशिप क्वालिटी की जागृति भी मन में होती है क्योंकि खेल का जो कप्तान होता है वह अपनी टीम को लीड करने की कला सीखता है, जिससे इमोशनल तौर पर अपने आप को लीडरशिप स्किल डेवलप करने में खेल एक कारगर तरीका है, उसी के साथ साथ अनुशासन का पालन भी खेल में अत्यंत ही आवश्यक है एक अनुशासित खिलाड़ी अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होता है, बिल्कुल उसी प्रकार लीडरशिप क्वालिटी हमें जीवन की विभिन्न पगडंडियों में हमें आगे बढ़ने में माइलेज प्रदान करती है, अनुशासन भी हमें अनुशासित रखकर जीवन में संयम धैर्य इत्यादि विभिन्न गुणों से संवारती है चुंकी किसी भी फील्ड में सफलता प्राप्त करने के लिए जीवन में अनुशासन का होना अत्यंत ही आवश्यक है, अगर गौर फरमाए भारत में खेले जाने वाले खेल में तो शायद क्रिकेट हर दूसरा व्यक्ति क्रिकेट प्रेमी नजर आता है वैसे तो खेल बहुत से हैं पर ओवरऑल देखा जाए तो क्रिकेट के प्रेमी भारत में अत्याधिक है इसके पश्चात अन्य खेल आते हैं तो लोगों को अपने जीवन में किसी भी तरह के खेल खासकर जो आउटडोर खेल को जीवन शैली में शामिल करना चाहिए
आगे डॉक्टर गुप्ता ने अपने आलेख में बतलाया कि खेल तथा व्यायाम हमारे जीवन के अभिन्न अंग है। बुद्धिजीवियों का यह कथन कि ‘‘एक स्वस्थ शरीर में ही एक स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है‘‘ अक्षरशः सही है। खेलों के माध्यम से हम अपने शरीर को क्रियाशील तथा स्वस्थ बनाये रखते हैं। साथ ही यह मन मस्तिष्क को प्रसन्नता से भर देता है। खेल बहुत ही अच्छी शारीरिक गतिविधि है जो न केवल तनाव व चिन्ता से मुक्ति प्रदान करता है, बल्कि पेशेवर जीवन का क्षेत्र भी प्रदान करता है। यह खिलाडियों को नाम, प्रसिद्धि और आर्थिक रूप से मजबूती प्रदान करता है। यह ऐसी शारीरिक गतिविधि है जो प्रतियोगी स्वभाव के कौशल विकास में भी अत्यधिक सहायक है। खेल के महत्व को आज से ही नही बल्कि प्राचीन समय से ही बुद्धिजीवियों द्वारा समझा गया है। प्राचीन समय में कुश्ती, भालाफेंक, तलवार-बाजी, रथ-दौड, तीरंदाजी आदि अनेक खेलों में लोग प्रतिभाग करते थे। आज के समय में क्रिकेट, हॉकी, वॉलीवाल, फुटबाल इत्यादि खेल युवाओं में लगन, नियमितता, धैर्य, अनुशासन, सहयोग आदि गुणों को विकसित करते हैं। इनसे समूह कार्य तथा सौहार्द की भावनायें प्रोत्साहित होती हैं। इसके साथ-साथ खिलाड़ियों के शारीरिक और मानसिक क्षमता का भी विकास होता है। इन्डोर खेल जो चार-दिवारी के अन्दर, घर के अन्दर या स्कूल के अन्दर भी खेले जाते हैं बहुत उपयोगी सिद्ध होते हैं। शतरंज, सुडूको आदि खेल हमारे मानसिक शक्ति और मन एकाग्र करने की क्षमता को विकसित करते हैं। नियमित रूप से खेल खेलना एक व्यक्ति के चरित्र व स्वास्थ को निखारने में सहायक होता है। ऐसा अक्सर देखा जाता है कि बचपन से खेल में शामिल रहने वाला व्यक्ति बहुत ही साफ और सशक्त चऱि़त्र के साथ ही अच्छे स्वास्थ्य को विकसित करता है।
आगे इंडस पब्लिक स्कूल के प्राचार्य डॉक्टर संजय गुप्ता ने बुलाया कि आज की वेबिनार में उपस्थित जनों नें विभिन्न तरह की बहुत महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल की जैसा कि संपूर्ण देश में लॉक डाउन की स्थिति बनी हुई है ऐसी परिस्थिति में लोगों को अपने मन व तन दोनों को स्वस्थ बनाएं रखना चैलेंज बना हुआ है साथ ही अपनी इम्मयूनीटी पॉवर के द्वारा बाहरी रोगकारक कीटाणुओं से शरीर की रक्षा करना भी इस दौरान अत्यंत ही आवश्यक है अलग-थलग रहने से दिमाग निष्क्रिय हो जाता है। खेलों से दिमाग को सक्रिय बनाया जा सकता है। लॉकडाउन के दौरान सामाजिक दूरी बनाये रखना हमारा परम् कर्तव्य है जिससे कि हम स्वयं को सुरक्षित रखते हुवे इस मानव समाज को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं । वहीं इस वैश्विक त्रासदी में अपने आप को व परिवार को स्वस्थ्य बनाये रखकर भी हम सामाजिक जिम्मेदारी ही निभाएंगे जिसके लिए वेबिनार के माध्यम से ना केवल विद्यालय के बच्चों को बल्कि साथ ही साथ उनके परिजनों को भी व घर के अन्य सदस्यों को भी वेबिनार में शामिल करवाकर खेल, योगा, मैडिटेशन, व्यायाम के प्रति प्रेरित किया गया चूंकि ऐसी परिस्थिति में अपने को फिट बनाये रखना अत्यंत आवश्यक है जिसके लिये घर पर प्राणायाम व योगा को जीवन शैली में शामिल करने हेतु लोगों को प्रेरित किया गया, जिससे कि शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ्य रहते हुवे अपने आप को खुश रखते हुवे उमंग उत्साह बरकरार रखते हुवे जीवन की गाड़ी पटरी पर दौड़ते रहने की प्रेरणा दी गई, सुबह सुबह आयोजित इस तरह के स्वास्थ्य हेतु लाभप्रद वेबिनार का हिस्सा बनकर सभी अत्यंत खुश हुवे तथा अपने परिवार के संग विभिन्न तरह के खेल खेलते हुवे फोटोग्राफ्स भी विद्यालय के व्हाटसअप नम्बर पर सेंड किये आज के दौर में प्रायः सभी भाग-दौड़ से भरी जीवन शैली में व्यस्त रहते हैं उनके पास लाइफ स्टाइल खेल कूद शामिल नाहोने से अनेकों तरह के रोग के कारण जन्म ले रही हैं। नित्य युवाओं में तरह तरह के पैदा हो रहे रोग, क्योंकि अब खेल-कूद पर ध्यान नही दे रहे युवा लोग।
आज लॉक डाउन के दौरान हम समूह में बिल्कुल नहीं खेल सकते लेकिन एकांत में ध्यान-योग-प्राणायाम तथा अन्य प्रकार के व्यायाम तो कर ही सकते हैं। परिवार के सदस्यों के साथ कैरम, लूडो, शतरंज आदि खेलों को खेलकर खाली समय का सही उपयोग किया जा सकता है। समय कठिन जरूर है लेकिन हौसला रखकर ही इस विषम परिस्थति से बाहर निकला जा सकता है। हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी इस वायरस के खात्मे को लेकर लगातार प्रयासरत हैं। तथा लगातार योग एवं व्यायाम के अभ्यास पर बल दे रहे हैं और इसके लाभों को बता रहे हैं कि ‘‘इससे शरीर स्वस्थ एवं मन प्रसन्न रहता है, साथ ही यह तनाव व चिन्ता भी कम करता है।‘‘ योग तथा व्यायाम से मन मस्तिष्क को सकारात्मक व प्रसन्न बनाये रखें, जिससे आने वाले समय में हम बेहतर ऊर्जा तथा उत्साह के साथ राष्ट्र निर्माण एवं उन्नति के कार्यों में अपना योगदान दे सके। अंधेरा कितना ही गहरा क्यों न हो, उजाले की एक किरण के आगे टिक नही सकता। ध्यान- व्यायाम व क्रीडा ऐसा प्रकाश है जो नकारात्मक विचारों के अंधेरे को समूल नष्ट करने की क्षमता रखता है। आइये सकारात्मक सोच के साथ हम स्वणर्णिम भविष्य की कामना करें।